Hasrat Mohani celebrated Janmashtami in Mathura Praying Lord Shri Krishna kept flute with him gave Inquilab Zindabad slogan


अलीगढ़। हसरत की भी कबूल हो मथुरा में हाजिरी, सुनते हैं आशिकों पे तुम्हारा करम है खास और पैगाम ए हयात ए जावेदां था, हर नगमा ए कृष्ण बांसुरी का…यह पंक्तियां हैं मौलाना हसरत मोहानी की। जन्म बेशक कानपुर की धरती पर लिया लेकिन एएमयू से पढ़ाई करने के दौरान आजादी के आंदोलन में शामिल हुए। इसके अलावा उनकी दूसरी पहचान अपनी कृष्णभक्ति से थी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर वह मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में कृष्णभक्ति में लीन होकर घूमते थे। इतिहास के जानकार बताते हैं कि वह एक बांसुरी भी अपने पास रखते थे।

कानपुर के मोहान नामक कस्बे में एक जनवरी 1875 को हसरत मोहानी का जन्म हुआ था। उन्होंने स्नातक की शिक्षा एएमयू से की थी। 1903 में उन्होंने बीए किया था। 1903 में अलीगढ़ से रिसाला (पत्रिका) उर्दू-ए-मुअल्ला का प्रकाशन शुरू किया था।  जिसमें ब्रिटिश हुकूमत की नीतियों के खिलाफ लिखा करते थे। 1921 में इंकलाब जिंदाबाद का नारा भी मौलाना हसरत मोहानी ने ही दिया था।

एएमयू लाइब्रेरियन प्रोफेसर निशात फातिमा ने बताया कि  मौलाना हसरत मोहनी के बारे में कहा जाता है कि वह प्रत्येक जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा जाया करते थे। पूरी रात कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। हसरत मोहानी का पूरा जीवन कृष्ण प्रेम में डूबा रहा। अधिकांश समय मथुरा-वृंदावन में बीता था। उन्होंने अपनी कई किताबों, कविताओं में कृष्ण भक्ति का जिक्र किया है।

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मेरा मजहब फकीरी है…

हसरत मोहानी एक बार लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे। इस दौरान वह कृष्ण भक्ति में एक नज्म गुनगुना रहे थे,  रास्ते में किसी अजनबी शख्स ने उनसे पूछा कि मौलाना साहब देखने से तो आप मुसलमान लगते हैं, फिर कृष्ण के गीतों क्यों गा रहे हैं। आपका मजहब क्या है। इस सवाल पर हसरत को हंसी आई और उन्होंने कविता पढ़कर समझाया कि ‘मेरा मजहब फकीरी और इंकलाब है, मैं सूफी मोमिन हूं और साम्यवादी मुसलमान।

2014 में मोहानी की स्मृति में जारी हुआ था डाक टिकट

हसरत मोहानी एक स्वतंत्रता सेनानी, एक शायर, एक पत्रकार, संविधान सभा के सदस्य और इंकलाब जिंदाबाद का नारा देने वाले भी रहे। अलीगढ़ में दानपुर कंपाउंड के पास उन्होंने पहले खादी आश्रम की भी स्थापना की थी। 2014 में भारत सरकार ने मौलाना हसरत मोहानी की स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया था।



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