Maruti Suzuki Cars Crash Test Results and Global NCAP Safety Rating


मारुति सुजुकी इंडिया की मोस्ट पॉपुलर Maruti  XL6 लॉन्च हो चुकी है। एक्स्ट्रा लार्ज स्पेस वाली इस कार का अपडेटेड मॉडल Kia Carens को टक्कर दे रहा है। इस कार को खरीदने के दौरान लोग सेफ्टी रेटिंग का कितना ध्यान रखते हैं? अक्सर लोग मॉडल और कीमत के सामने कार की सेफ्टी को दरकिनार कर देते हैं। आपको जानकर हैरत होगी की मारुति के कई मॉडल सेफ्टी रेटिंग में खरे नहीं उतरते हैं। देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप-10 कारों में मारुति के सबसे ज्यादा मॉडल होते हैं। बीते महीने भी टॉप-10 कारों में 6 मॉडल मारुति के शामिल रहे। मारुति के ज्यादातर मॉडल को ग्लोबल NCAP ने जीरो रेटिंग दी है। मारुति की अर्टिगा और XL6 ही ऐसी कारें हैं जिन्हें 3-स्टार रेटिंग मिली है।

NCAP रेटिंग क्या होती है? किसी कार को खरीदते वक्त इस रेटिंग को ध्यान रखना कितना जरूरी है? यदि रेटिंग जीरो है तो क्या उस कार को खरीदने में नुकसान है, या फिर खरीदना ही नहीं चाहिए? इन तमाम बातों को समझने के लिए हमने यूट्यूबर और ऑटो एक्सपर्ट अमित खरे (आस्क कारगुरु) से बात की। उनका इन सवालों पर क्या कहना है, आप भी जानिए।

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NCAP क्रैश टेस्ट क्या है, इसे कैसे किया जाता है?

भारत में कार बेचने वाली सभी कंपनियों के लगभग सभी मॉडल का NCAP द्वारा क्रैश टेस्ट किया जाता है। टेस्ट के दौरान गाड़ी को तय स्पीड पर किसी ऑब्जेक्ट के साथ टकराया जाता है। इस टेस्ट के लिए कार में डमी का इस्तेमाल किया जाता है। डमी इंसान के जैसी होती है। टेस्ट के दौरान कार में 4 से 5 डमी का इस्तेमाल किया जाता है। बैक सीट पर बच्चे की डमी होती है। क्रैश टेस्ट के बाद कार के एयरबैग ने काम किया या नहीं? डमी कितनी डैमेज हुई? कार के सेफ्टी फीचर्स ने कितना काम किया? इन सब के आधार पर रेटिंग दी जाती है। ये भी देखा जाता है कि कार में एडल्ट और बच्चे कितने सुरक्षित रहे।

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ग्लोबल NCAP रेटिंग पर एक्सपर्ट का ओपिनियन

अमित खरे ने बताया कि ग्लोबल NCAP टुवर्ड्स जीरो फाउंडेशन का हिस्सा है। ये ब्रिटेन की एक चैरिटी ऑर्गनाइजेशन है। इसके चेयरमैन कभी भारत के खिलाफ थे। भारत के क्रैश टेस्ट सिस्टम का नाम भारत न्यू व्हीकल सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम (BNVSAP) है। ये 2018 में शुरू होना था, लेकिन किसी वजह से ये शुरू नहीं हो पाया। ये वैसा ही प्रोग्राम है जैसा भारत में पहले से मौजूद ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) कर रहा है। BNVSAP जिन सॉफ्टवेयर पर काम करेगा वो NCAP से ही खरीदे जाएंगे। तब तक भारत सरकार की तरफ से किसी को भी इस बात की परमिशन नहीं दी गई है कि वो क्रैश टेस्ट कंडक्ट करे।

पैसे देकर भी कारों की सेफ्टी रेटिंग बढ़ रही

अमित ने आगे बताया कि जब ग्लोबल NCAP के क्रैश टेस्ट रेटिंग को लोग समझने लगे और इसका असर कार कंपनियों पर होने लगा, तब कुछ कंपनियों ने NCAP से कॉन्टैक्ट किया। ऐसे में उन कंपनियों ने NCAP को पैसे देकर टेस्ट कंडक्ट कराया। इस टेस्ट को वो वॉलेंटियर टेस्ट का नाम देने लगे। इस टेस्ट की खास बात ये होती है कि क्रैश टेस्ट का सारा खर्च कार बनाने वाली कंपनी उठाती है। इस टेस्ट में पैसों के लेन-देन से कार की रेटिंग बेहतर हो जाती है। पैसे देकर कारों की सेफ्टी रेटिंग के नंबर बढ़ा दिए जाते हैं। अब कई कंपनियां भी इस रेटिंग को खरीदकर कार को बेचने में इस्तेमाल करती हैं।

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सभी कंपनियों के टॉप मॉडल का टेस्ट नहीं होता

ग्लोबल NCAP कार के बेस वैरिएंट को खरीदने के बाद उन्हें इंग्लैंड और जर्मनी की लैब में ले जाती है। बेस वैरिएंट में बहुत सारे सेफ्टी फीचर्स नहीं होते हैं इस वजह से उनकी रेटिंग जीरो से लेकर 2 स्टार तक जाती है। दूसरी तरफ वॉलेंटियर टेस्ट के दौरान कंपनी कार का टॉप वैरिएंट टेस्ट करती है। ऐसे में सेफ्टी फीचर्स बेहतर होने की वजह से उसे बेहतर रेटिंग मिलती है। जबकि NCAP को सभी कंपनियों के बेस या टॉप मॉडल का टेस्ट करना चाहिए। टाटा और महिंद्रा की गाड़ियों की बेहतर सेफ्टी रेटिंग में वॉलेंटियर टेस्ट शामिल होते हैं। कुल मिलाकर अभी NCAP कार टेस्ट रेटिंग के कोई खास मायने नहीं हैं।

अब तो कार का हर वैरिएंट सेफ

सरकार ने कार के बेस वैरिएंट में डुअल एयरबैग का नियम तैयार किया है। यानी ड्राइवर के साथ फ्रंट पैसेंजर के लिए एयरबैग मिलेगा। वहीं, 1 अक्टूबर, 2022 से कार में 6 एयरबैग का नियम लागू होने वाला है। इसके अलावा बेस वैरिएंट में सीट बेल्ट अलर्ट, स्पीड अलर्ट, ABS के साथ EBD, पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स आने लगे हैं। यानी अब किसी भी मॉडल का बेस वैरिएंट पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार के इस कदम के बाद मारुति ने अपनी मोस्ट पॉपुलर ऑल्टो और एस-प्रेसो के बेस वैरिएंट को बंद करने का फैसला भी लिया है, क्योंकि इन दोनों कारों में सिंगल एयरबैग है।



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