Poll percentage during five phase voting in UP same as in 2017 assembly elections


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब तक हुए पांच चरणों में कमोबेश 2017 जितनी ही या कम वोटिंग हुई है। वोटिंग ट्रेंड को लेकर एक्सपर्ट अब इस बात के आकलन में जुट गए हैं कि यह प्रो इंकम्बेंसी है या एंटी इंकम्बेंसी।  2019 के लोकसभा चुनाव का वोटिंग ट्रेंड भी इससे बहुत अलग नहीं था। कुछ लोग इसके पीछे कोरोना महामारी को वजह बताते हैं तो अन्य कहते हैं कि जनता ने सभी दलों को देख लिया है और इसलिए विभिन्न चुनावी दलों की ओर से किए गए वादों को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं। 

उत्तर प्रदेश में पांच फेज की वोटिंग हो चुकी है, जबकि 2 चरणों में मतदान होना बाकी है। 3 और 7 मार्च को छठे और सातवें चरण की वोटिंग होगी। मतगणना 10 मार्च को होगी। उसी दिन पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के नतीजे भी घोषित किए जाएंगे।  

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को पहले फेज की वोटिंग में 62.43 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। 2017 में 63.47 फीसदी वोटिंग हुई थी जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में 61.84 फीसदी वोट पड़े थे। हालांकि, हिंदुओं के कथित पलायन को लेकर पहले भी सुर्खियों में रहे कैराना में मतदान में इजाफा दर्ज किया गया। यहां 69.56 फीसदी से बढ़कर 75.12 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। 

चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए डेटा के मुताबिक, 14 फरवरी को दूसरे फेज में 55 सीटों पर 64.42 फीसदी मतदान हुआ, जबकि 5 साल पहले 65.53 फीसदी मतदान हुआ था। 2019 लोकसभा चुनाव में 63.13 फीसदी वोट पड़े थे। जेल में बंद सपा के दिग्गज नेता आजम खान की सीट रामपुर में पिछले विधानसभा चुनाव के बराबर ही करीब 64 फीसदी वोटिंग हुई। 

तीसरे फेज की बात करें तो 62.28 फीसदी वोटिंग हुई। पांच साल पहले विधानसभा चुनाव के तीसरे फेज में लगभग इतनी ही 62.21 फीसदी मतदान हुआ था। पिछले लोकसभा चुनाव में 59.73 फीसदी वोटिंग हुई थी। इसी फेज में करहल में भी वोटिंग हुई, जहां से सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं। मुलायम के गढ़ में 1974 के बाद सबसे अधिक वोटिंग हुई।

25 फरवरी को चौथे फेज में 59 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिसमें 61.52 फीसदी मतदान हुआ। 2017 में 62.55 फीसदी वोटिंग हुई थी तो 2019 में 60.3 फीसदी वोटर्स ने मताधिकार का प्रयोग किया था। अयोध्या, प्रयागराज, अमेठी और रायबरेली जैसे जिलों में 61 सीटों पर पांचवें चरण की वोटिंग में 57.32 फीसदी वोटर्स ने ईवीएम का बटन दबाया। 2017 में 58.24 फीसदी और 2019 लोकसभा चुनाव में 55.31 फीसदी मतदान हुआ था। छठे चरण में गोरखपुर अर्बन जैसे सीटों पर वोटिंग है, जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ रहे हैं। 2017 में 56.52 फीसदी वोटिंग हुई थी। अंतिम चरण में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मतदान होना है। वोटर्स के सामने 2017 के 59.56 फीसदी वोटिंग से आगे निकलने की चुनौती है।  

वोटिंग ट्रेंड पर सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि यह कमोबेश पिछले साल की तरह ही है, जिसका मतलब है कि चुनाव सही दिशा में जा रहा है। पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी इस पर हैरानी जताते हुए कहते हैं, ”मुझे आश्चर्य है कि इस बार मतदान प्रतिशत क्यों नहीं बढ़ा? हो सकता है कि इस बार मतदाताओं को जागरूक करने का प्रयास कम हुआ?” 

लोकनीति के को-फाउंडर और चुनाव एक्सपर्ट संजय कुमार ने कहा, ”यदि आप पिछले चुनावों से तुलना करते हैं तो वोटिंग बहुत कम नहीं है। 1-2 फीसदी का अंतर है। आमतौर पर जब लोग सरकार बदलने का फैसला करते हैं तो इसके लिए माहौल बनता है, जिससे अधिक मतदान होता है। 2014 लोकसभा चुनाव में यह साफ दिखा था, 2009 के मुकाबले मतदान में इजाफा हुआ था।” एक्सपर्ट ने कहा, ”वोटर्स के मन में उदासीनता है। प्रो इंकम्बेंसी है या एंटी इंकम्बेंसी का नतीजा है यह तो चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद ही कहा जा सकता है।”  

बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा, ”बीजेपी के वोटर्स मतदान के लिए घरों से बाहर निकल रहे हैं। हालांकि, यह दूसरे दलों के लिए नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि उनके वोटर्स निष्क्रिय हैं। हो सकता है कि ऐसा सपा की अगुआई वाले गठबंधन में मतभेद की वजह से हो।” वहीं, सपा के प्रवक्ता राजपाल कश्यप ने कहा कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और कोरोना की लहर कमजोर पड़ने से लोगों का काम के लिए बाहर जाना भी कम वोटिंग फीसदी के कारक हो सकते हैं।  



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