Read how Mukesh Ambani cleverly snatched Big Bazaar from Amazon by defeating Jeff Bezos – Business News India


अब Amazon.com Inc. भी उन कंपनियों की सूची में जुड़ गयी है जिसे मुकेश अंबानी ने बाजीगरी में मात दी है। उन्होंने न केवल भारत के रिटेल मार्केट सेगमेंट पर हावी होने की लड़ाई में अमेरिकी दिग्गज को झटका दिया है बल्कि अब उनके पास खुदरा विक्रेता को खरीदने के लिए 3.4 बिलियन डॉलर के लड़ाई में सभी कार्ड हैं। 

रिलायंस की रणनीति 

फरवरी के अंत में अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने चुपचाप कर्मचारियों की हायरिंग शुरू कर दिया था और फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन लिमिटेड द्वारा चलाए जा रहे सैकड़ों स्टोरों के लीज एग्रीमेंट पर कब्जा कर लिया। यहां तक ​​​​कि अमेज़ॅन ने भारत और सिंगापुर से मुकदमों और मध्यस्थता के माध्यम से औपचारिक अधिग्रहण को रोकने की कोशिश भी की। अंबानी के इस कदम ने अमेज़ॅन को समझौता करने के लिए मजबूर किया और फ्यूचर के निवेशकों और ऋणदाताओं को संपत्ति-विपणन से सावधान कर दिया।

रिलायंस के कदम से आश्चर्यचकित फ्यूचर

फ्यूचर रिटेल के चीफ फाइनेंसियल ऑफिसर चंद्र प्रकाश तोशनीवाल ने 2 मार्च को रिलायंस रिटेल की इकाइयों को लिखे पत्र में कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारे साथ इस मामले पर चर्चा किए बिना, रिलायंस समूह इस तरह की कठोर कार्रवाई करेगा।” उन्होंने कहा, इस बात की पुष्टि कीजिए भुगतान में कोई ज्यादा कटौती नहीं की जाएगी। 5 मार्च के एक और पत्र के अनुसार (ब्लूमबर्ग के पास फ्यूचर लाइफस्टाइल द्वारा भेजे गए दोनों पत्रों की प्रतियां हैं)- फ्यूचर लाइफस्टाइल ने “चिंता और सदमे” को व्यक्त किया और रिलायंस से अनुरोध किया कि वह ऐसी कार्रवाई न करे जिसे “ऋणदाताओं द्वारा गंभीरता से देखा जाए, जिनके पास कंपनी की वर्तमान और अचल सम्पतियों का प्रभार है। पत्र में कहा गया है कि बैंक फ्यूचर की क्रेडिट लाइनों को काट सकते हैं, जो पहले से ही नकदी की कमी वाले रिटेलर के पास बचा हुआ है।

अमेज़न की आपत्ति के बाद मामला उलझा

किशोर बियानी के नेतृत्व वाला फ्यूचर ग्रुप दो बड़े निगमों के बीच तब उलझ गया जब अमेज़ॅन ने रिलायंस के अगस्त 2020 के फ्यूचर रिटेल के स्टोर और गोदामों को 247.1 बिलियन रुपये (3.4 बिलियन डॉलर) में खरीदने की पेशकश पर आपत्ति जताई। अमेरिकी ई-कॉमर्स दिग्गज ने कहा कि इस सौदे ने फ्यूचर ग्रुप की एक अन्य फर्म के साथ 2019 के समझौते का उल्लंघन किया क्योंकि इसने फ्यूचर रिटेल को खत्म कर दिया, जो ऋण दायित्वों से चूक गया है और दिवालियापन जोखिम का सामना कर रहा है। महामारी की चपेट में आने से पहले फ्यूचर ग्रुप ने भारत का सबसे बड़ा रिटेल चैन था। इसके बाद यह दुनिया के दो सबसे अमीर– अंबानी और अमेज़ॅन के जेफ बेजोस के लिए एक विवाद का मुद्दा बन गया – क्योंकि वे दोनों उपभोक्ता बाजार पर नियंत्रण चाहते हैं।

इस कदम के बाद मजबूत स्थिति में रिलायंस

रिलायंस, अमेज़ॅन और फ्यूचर ग्रुप के प्रतिनिधियों ने पत्रों पर टिप्पणी मांगने वाले ईमेल से तुरंत जवाब नहीं दिया। ब्लैकस्टोन इंक और एल कैटरटन सहित फ्यूचर ग्रुप के निवेशकों और ऋणदाताओं का भाग्य अब अधर में लटक गया है क्योंकि रिलायंस, फ्यूचर और अमेज़ॅन 15 मार्च तक अदालत के बाहर समझौता कर सकते हैं और उन्हें मामले की प्रगति को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में रिपोर्ट करना है।

वित्तीय सलाहकार फर्म ब्रेस्कॉन एंड एलाइड पार्टनर्स एलएलपी के मुंबई स्थित संस्थापक निर्मल गंगवाल के अनुसार, रिलायंस की सामरिक जीत उसकी “मास्टर की” है जो इसे बातचीत की टेबल पर सबसे मजबूत स्थिति प्रदान करती है। रिलायंस का दबदबा देखने वाली अमेज़ॅन एक और कंपनी है कि कैसे रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स, क्रूड ऑयल रिफाइनिंग, कंज्यूमर रिटेल, टेलीकॉम, डिजिटल सर्विसेज ग्रीन एनर्जी में हावी है।

मौन अधिग्रहण

स्थानीय मीडिया द्वारा रिलायंस के लगभग 200 स्टोरों के मौन अधिग्रहण की रिपोर्ट और फ्यूचर के स्टोर के लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर और फ्यूचर ग्रुप के 30,000 कर्मचारियों को नौकरी के प्रस्ताव भेजने की रिपोर्ट के बाद अमेज़न ने मामले को ख़तम करने की मांग की। अमेज़न का अविश्वास पिछले हफ्ते अदालत की सुनवाई के दौरान सामने आया।

अमेरिकी ई-टेलर के वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि फ्यूचर ग्रुप ने उन्हें बताया कि रिलायंस के साथ सौदा पूरा होने में छह महीने या उससे अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा, “इस बात के मुश्किल से ही 48 घंटे हुए हैं और लोग शॉप्स पर कब्जा कर रहे हैं।” घटते नकदी प्रवाह और परिचालन के कारण फ्यूचर की दो फर्मों पर कुल कर्ज में 300 अरब रुपये का बकाया है। मामले की जानकारी रखने वाले एक करीबी एक व्यक्ति ने कहा कि रिलायंस उस निश्चित समझौते का सम्मान करेगा, जिस पर उन्होंने अतीत में हस्ताक्षर किए थे। 



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